क्या है ‘घोस्ट विलेज’?
उत्तराखंड के दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में स्थित ऐसे गाँव जहाँ आबादी बहुत कम रह गई है या पूरी तरह खाली हो चुके हैं, उन्हें “घोस्ट विलेज” कहा जाता है। इन गाँवों से भारी संख्या में लोग रोज़गार, शिक्षा और सुविधाओं की तलाश में मैदानों की ओर पलायन कर चुके हैं। वर्ष 2024 के आंकड़ों के अनुसार राज्य में 1,200 से अधिक गांव ‘घोस्ट विलेज’ घोषित किए जा चुके हैं।
सरकार की नई योजना: घोस्ट विलेज में गूंजेगी शहनाई
उत्तराखंड सरकार ने पलायन की इस चुनौती से निपटने के लिए एक नई और क्रांतिकारी योजना की घोषणा की है। इसके तहत ऐसे घोस्ट विलेजों को लक्ज़री वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जाएगा।
पर्यटन और स्थानीय विकास का संगम
राज्य सरकार का मानना है कि इस कदम से सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और उत्तराखंड की लोकपरंपराओं को वैश्विक पहचान भी मिलेगी।
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा:
“हम चाहते हैं कि हमारे गांवों में फिर से जीवन लौटे। अगर पहाड़ी क्षेत्र शादी जैसे आयोजन के लिए आकर्षण का केंद्र बनेंगे, तो स्थानीय लोगों को घर लौटने का कारण मिलेगा।”
“हम तीन वर्षों से कर रहे हैं तैयारी” – सतपाल महाराज
पर्यटन मंत्री ने कहा:
“हम इस दिशा में पिछले तीन वर्षों से लगातार काम कर रहे हैं। हमारे ऊपरी क्षेत्रों में बहुत ही सुंदर गांव हैं, लेकिन अब ये गांव वीरान हो चुके हैं। सरकार की नई पहल से रिवर्स माइग्रेशन (वापसी पलायन) को बढ़ावा मिलेगा और नए रोजगार के अवसर सृजित होंगे।”