कुमाऊं में एक दिन बाद दिवाली क्यों मनाई जाती है — यह सवाल हर साल दिवाली के वक्त लोगों के मन में उठता है। इस बार जहां पूरे देश में 20 अक्टूबर को दीपावली मनाई जा रही है, वहीं उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में 21 अक्टूबर को दिवाली का पर्व मनाया जाएगा। अब सवाल यह है कि आखिर कुमाऊं में एक दिन बाद दिवाली क्यों मनाई जाती है, इसका धार्मिक और खगोलीय कारण क्या है?
दिवाली की तिथि & समय (2025)
- देश भर में दिवाली होगी 20 अक्टूबर 2025, लेकिन कुमाऊं में दिवाली होगी 21 अक्टूबर 2025।
- अमावस्या तिथि — 21 अक्टूबर को शाम 5:55 बजे तक बनी रहेगी।
- प्रदोष काल — सायं 5:35 बजे से 8:14 बजे तक — यही शुभ समय माना गया है लक्स्मी पूजन के लिए।
- चंद्रमा दर्शन / नक्षत्र — चित्रा नक्षत्र 10:59 बजे रात्रि तक रहेगा।
तो अगर आप कुमाऊं मंडल में हैं, तो 21 अक्टूबर की रात को दीपोत्सव मनाइए — क्योंकि कुमाऊं में दिवाली 2025 की तिथि यही है।
कुमाऊं में दिवाली एक दिन बाद क्यों मनाई जाती है? — रामदत्त पंचांग बनाम बनारस पंचांग
कुमाऊं में आज भी रामदत्त पंचांग का पालन किया जाता है, जो निर्णय प्रणाली (Nirnay System) पर आधारित है।
जबकि देश के बाकी हिस्सों में बनारस पंचांग का प्रयोग होता है, जो सयन प्रणाली (Sayana System) पर आधारित है।
ये दोनों प्रणाली चंद्र दर्शन और सूर्यदर्शन की गणना अलग-अलग करती हैं — और यही वजह है कि पर्वों की तिथि में एक दिन का अंतर बनता है।
इस कारण कुमाऊं मंडल में दिवाली एक दिन बाद मनाई जाती है, जबकि अधिकांश हिस्सों में 20 अक्टूबर को दीपोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा।
पर्वोत्सव रीतियाँ — माला पर्व से लेकर भाईदूज तक
कुमाऊं में दिवाली केवल दीपों का त्योहार नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामूहिक उत्सव है।
यहां दिवाली से पहले माला पर्व मनाया जाता है — आंगन और घर मिट्टी के दीयों से सजाए जाते हैं।
उसके बाद 21 अक्टूबर को लक्ष्मी पूजन, गोवर्धन पूजा और भाईदूज बड़े उत्साह से साथ मनाए जाएंगे।
निष्कर्ष
- कुमाऊं में दिवाली 2025 की तारीख — 21 अक्टूबर
- प्रदोष काल — 5:35 बजे से 8:14 बजे
- रामदत्त पंचांग के अनुसार निर्णय प्रणाली लागू होने के कारण
- This year, दिवाली की तिथियों में भिन्नता दिखेगी ऐसे वहीं देशों में अन्य जगहों पर 20 अक्टूबर को दिवाली मनाई जाएगी।





