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Uttarakhand Green cess 2026: बाहरी वाहनों पर लगेगा शुल्क, 1 जनवरी से नियम लागू

On: December 19, 2025 9:30 PM

By Ankush bhandari

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Uttarakhand Green cess 2026 को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। यह खबर पूरी तरह सच है, लेकिन इसमें साल को लेकर एक अहम सुधार है। चूंकि अभी दिसंबर 2025 चल रहा है, इसलिए यह नियम 1 जनवरी 2026 से प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 18 दिसंबर 2025 को अधिकारियों के साथ बैठक कर इस योजना में हो रही देरी पर कड़ी नाराज़गी भी जताई है।

उत्तराखंड सरकार का यह फैसला राज्य के पर्यावरण संरक्षण और बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के उद्देश्य से लिया गया है। खासतौर पर हिमालयी क्षेत्रों में बाहरी वाहनों की संख्या बढ़ने से पर्यावरण पर पड़ रहे दबाव को कम करने के लिए उत्तराखंड ग्रीन सेस 2026 लागू किया जा रहा है।


कितनी होगी ग्रीन सेस फीस? (वाहन श्रेणी अनुसार)

उत्तराखंड में ग्रीन सेस वाहन की श्रेणी के आधार पर तय किया गया है:

  • निजी कार / टैक्सी / मैक्सी कैब: ₹80 प्रति एंट्री
  • बसें (12 सीट से अधिक): ₹140 प्रति एंट्री
  • हल्के मालवाहक वाहन (3 से 7.5 टन): ₹120
  • भारी वाहन (ट्रक / कंस्ट्रक्शन मशीनरी): ₹250 से ₹700 तक (एक्सेल और भार के अनुसार)

यह शुल्क हर बार राज्य में प्रवेश पर लागू होगा, लेकिन इसकी वैधता 24 घंटे तक रहेगी।


ग्रीन सेस के मुख्य नियम और सुविधाएं

उत्तराखंड ग्रीन सेस 2026 से जुड़े अहम नियम इस प्रकार हैं:

  • FASTag से भुगतान: यह शुल्क टोल टैक्स की तरह सीधे आपके FASTag से कटेगा।
  • ANPR कैमरे: राज्य की सीमाओं पर 16 स्थानों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे लगाए जा रहे हैं।
  • 24 घंटे की वैधता: एक बार कटने के बाद 24 घंटे तक दोबारा प्रवेश करने पर शुल्क नहीं लगेगा।

किन वाहनों को मिलेगी छूट? (Exemptions)

निम्नलिखित वाहनों को ग्रीन सेस शुल्क से पूरी छूट दी गई है:

  • उत्तराखंड में रजिस्टर्ड (UK नंबर) वाहन
  • इलेक्ट्रिक वाहन (EV)
  • सीएनजी (CNG) वाहन
  • दोपहिया वाहन
  • सरकारी वाहन
  • एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड

सरकार का कहना है कि स्थानीय लोगों और पर्यावरण-अनुकूल वाहनों को किसी भी तरह का आर्थिक बोझ न झेलना पड़े।


ग्रीन सेस लागू करने का उद्देश्य क्या है?

उत्तराखंड ग्रीन सेस 2026 लागू करने के पीछे सरकार के दो प्रमुख उद्देश्य हैं:

1-पर्यावरण संरक्षण

हिमालयी राज्य में बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करना और पर्यावरण संतुलन बनाए रखना।

2-राजस्व वृद्धि

सरकार को इससे सालाना करीब 50 से 100 करोड़ रुपये की आय होने की उम्मीद है। इस राशि का उपयोग:

  • सड़क सुरक्षा सुधार
  • वृक्षारोपण
  • पर्यावरण संरक्षण परियोजनाओं के लिए किया जाएगा।

निष्कर्ष

अगर आप या आपका कोई जानने वाला 1 जनवरी 2026 के बाद बाहर के नंबर की गाड़ी से उत्तराखंड आने का प्लान बना रहा है, तो अब अपने बजट में यह अतिरिक्त ग्रीन सेस जरूर जोड़ लें। उत्तराखंड ग्रीन सेस 2026 न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अहम कदम है, बल्कि यह राज्य के विकास में भी सहायक साबित हो सकता है।

Ankush bhandari

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