Haldwani hospital news |Haldwani
हल्द्वानी के चंदन अस्पताल से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने इंसानियत और स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अल्मोड़ा जिले से इलाज के लिए रेफर होकर आई 42 साल की सीमा बिरौडिया की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। इसके बाद जो हुआ, उसने पीड़ित परिवार को अंदर तक तोड़ दिया।
अल्मोड़ा की रहने वाली थीं सीमा बिरौडिया
सीमा बिरौडिया अल्मोड़ा जिले के गोंला करिया धारा नौला गांव की रहने वाली थीं। वह लंबे समय से किडनी की बीमारी से जूझ रही थीं और डायलिसिस पर थीं। जब उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ी तो उन्हें अल्मोड़ा के बेस अस्पताल से हल्द्वानी रेफर किया गया।
शनिवार शाम करीब 4:30 बजे उन्हें हल्द्वानी के चंदन अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया।
दो घंटे का इलाज, फिर मौत
परिजनों के अनुसार अस्पताल में भर्ती करते समय इलाज के नाम पर महिला के पति नंदन बिरौडिया से 57 हजार रुपये जमा करवा लिए गए। नंदन पेशे से टैक्सी चालक हैं और आर्थिक रूप से कमजोर हैं।
करीब दो घंटे तक इलाज चला, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ और कुछ समय बाद डॉक्टरों ने सीमा को मृत घोषित कर दिया।
परिजनों का आरोप: पैसे न देने पर शव नहीं दिया
महिला की मौत के बाद परिवार पूरी तरह टूट गया। इसी बीच परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने और पैसे मांगे। जब परिवार पैसे नहीं जुटा पाया, तो कई घंटों तक शव नहीं सौंपा गया।
परिजनों का कहना है कि उस समय वे बेहद डरे और परेशान थे और किसी तरह रिश्तेदारों से मदद लेकर ही पुलिस तक पहुंचे।
पुलिस से लगाई गुहार, एसएसपी ने दिया भरोसा
रात करीब 10 बजे पीड़ित परिवार ने पुलिस और एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी से संपर्क किया। मामला सामने आते ही एसएसपी ने इसे गंभीर मानते हुए तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए।
पुलिस टीम अस्पताल पहुंची, मैनेजर को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई और जरूरी कार्रवाई के बाद शव परिजनों को सौंपा गया।
एसएसपी का साफ संदेश
एसएसपी ने कहा कि किसी भी हाल में मानव शरीर को दबाव या पैसे वसूलने का जरिया नहीं बनाया जा सकता। इलाज से जुड़ा कोई भी बिल हो, उसे कानूनी और शालीन तरीके से निपटाया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी साफ किया कि अगर अस्पताल प्रबंधन की गलती पाई जाती है, तो उनके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
एक परिवार का दर्द, सिस्टम पर सवाल
यह मामला सिर्फ एक मौत का नहीं है, बल्कि उस दर्द का है, जहां एक गरीब परिवार अपने प्रिय को खोने के बाद भी अपमान और डर से गुजरता है। निजी अस्पतालों की जिम्मेदारी और मानवीय व्यवहार को लेकर यह घटना कई सवाल छोड़ जाती है।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि सच्चाई सामने आने पर उचित कार्रवाई होगी।





