उत्तराखंड पंचायत चुनाव ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सोशल मीडिया पर लाखों फॉलोअर्स और सब्सक्राइबर्स होना ही जीत की गारंटी नहीं होती। जनता के बीच काम, उनके दिलों में जगह और जमीनी पकड़ चुनावी सफलता की असली कुंजी हैं। हाल ही में संपन्न पंचायत चुनावों में कई सोशल मीडिया स्टार्स ने किस्मत आजमाई, लेकिन नतीजे उनके लिए बेहद निराशाजनक रहे।
दीपा नेगी की हार
रुद्रप्रयाग जिले के घिमतोली गांव की दीपा नेगी उत्तराखंड की जानी-मानी ब्लॉगर हैं, जो सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं। उनके यूट्यूब चैनल “दीपा नेगी पहाड़ी” पर 1.28 लाख सब्सक्राइबर हैं। फैन फॉलोइंग और सोशल मीडिया लोकप्रियता को देखकर शायद दीपा ने प्रधान पद के लिए चुनाव लड़ने का फैसला किया, लेकिन उन्हें केवल 269 वोट ही मिले। उनकी प्रतिद्वंदी कविता ने 480 वोट हासिल कर शानदार जीत दर्ज की। दीपा की हार के बाद सोशल मीडिया पर लोग तरह-तरह की टिप्पणियां कर रहे हैं। हालांकि, दीपा ने हार स्वीकार करते हुए कहा, “लोकतंत्र में जनता का फैसला सिर माथे पर, जिसे जनता चुनती है वही गांव का सेवक बनता है।”
भीम सिंह निगल्टिया का हाल
हल्द्वानी के बच्चीनगर ग्राम पंचायत से प्रधान पद पर चुनाव लड़ रहे भीम सिंह निगल्टिया के यूट्यूब चैनल पर 21,000 सब्सक्राइबर्स और फेसबुक पेजों पर कुल 24,000 फॉलोअर्स हैं। इसके बावजूद भीम सिंह को महज 955 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंदी हरेंद्र सिंह ने 1534 वोट पाकर जीत हासिल की। सोशल मीडिया पर उनके फैंस का कहना है, “भाई, रील्स बनाने से वोट नहीं मिलते, दिल जीतना पड़ता है।”
दीप्ति बिष्ट की भी करारी हार
पिथौरागढ़ जिले की दीप्ति बिष्ट के यूट्यूब पर डेढ़ लाख और फेसबुक पर एक लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं। उन्होंने कनालीछीना ब्लॉक के डुंगरी ग्राम पंचायत से प्रधान पद के लिए चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें केवल 55 वोट मिले। कुल 178 वोटों में सबसे ज्यादा 79 वोट पाकर राधिका देवी विजयी रहीं। दीप्ति की यह हार भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है।
स्वाति नयाल भी हारी चुनाव
नैनीताल जिले की स्वाति नयाल के फेसबुक और इंस्टाग्राम पर हजारों फॉलोअर्स हैं। वह जन समस्याओं को सोशल मीडिया पर उठाती रहती हैं, लेकिन धारी ब्लॉक के लेटीबुंगा ग्राम पंचायत से चुनाव में उन्हें भी हार का सामना करना पड़ा।
सोशल मीडिया फेम से नहीं जीते जाते चुनाव
इन नतीजों ने साफ कर दिया कि पंचायत स्तर पर चुनाव जीतने के लिए डिजिटल प्रसिद्धि से ज्यादा जरूरी है जमीनी हकीकत को समझना, गांव के लोगों के बीच रहकर काम करना और उनकी समस्याओं का समाधान करना। चुनाव में सोशल मीडिया फेम काम नहीं आई और हारने वाले यूट्यूबर्स अब सोशल मीडिया पर खुद मजाक का विषय बन गए हैं।